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भ्रष्टाचार की गिरफ्त में बड़ोदरा गुजरात ग्रामीण बैंक व इनकम टैक्स विभाग ..? Featured

Written by  Published in Opinion Thursday, 14 June 2018 09:41

श्यामजी मिश्रा

देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आज तक कोई बड़ी लड़ाई नहीं लड़ी गई। अब तो ऐसा लग रहा है कि बहुत चालाकी से नोटबंदी, जीएसटी और आधार कार्ड को ही इस लड़ाई का हीरो बना दिया गया है। कालाधन बाहर निकला नहीं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का ऐलान कर दिया गया। नोटबंदी के समय कहा गया था कि पांच सौ और हजार रुपए के जितने नोट छपे हैं, उससे ज्यादा बाजार में चल रहे हैं। जब ये नोट वापस आयेंगे और तब सरकार को पता चलेगा कि सचमुच में काला धन कितना था।

परंतु अब तक देशवासियों को नहीं बताया गया कि कितने नोट वापस आये और देश में कुल कितना काला धन है। जबकि देखा जाये तो नोटबंदी के बाद इनकम टैक्स विभाग वालों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ी और उद्योगपतियों तथा कारोबारियों के यहां छापे भी मारे गए। इन उद्योगपतियों और कारोबारियों के पास से अकूत कालाधन व बेनामी संपत्तियों का खुलासा भी हुआ। वैसे देखा जाए तो देश भर में भ्रष्टाचार की लड़ाई एकदम व्यवहारिक है, जिसके नतीजों को देखा और महसूस किया जा सकता है।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भ्रष्टाचार से लड़ने वाले सभी लड़ाके अपने अतीत में अच्छे भले दागदार हैं। इसलिए राजनीतिक गठबंधनों के नये केमिकल को अच्छा कहने से पहले पिछले तीन सालों के अनुभवों, सच्चाइयों व आंकड़ों पर एक नजर जरूर डाल लेनी चाहिए ताकि हमें भ्रष्टाचार पर जीत के प्रपंच से भरमाया न जा सके। आजकल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस से लेकर खाद्य उत्पादों तक बहुत सारी कंपनियां उभरने लगी हैं। बैंकों को चूना लगाने वाले उद्यमी भी अब मेक इन इंडिया का ज्ञान देते मिल जाते हैं । सरकारी सर्विसेज में तो आजकल करप्शन के रेट दुगने हो गए हैं। ऐसे कई उदाहरण आपको मिल जायेंगे जहां सरकार के बड़े अधिकारी किसी भी प्रोजेक्ट में पार्टनरशिप की डील करते हैं।

अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कहते हैं कि ' न खाऊंगा न खाने दूंगा' और भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ दूंगा। परंतु श्री मोदी जी के इस कथन को क्या बड़ोदरा गुजरात ग्रामीण बैंक व  इनकम टैक्स विभाग के बड़े अधिकारी मानने को तैयार हैं ?  बल्कि एक प्रकार से देखा जाए तो वलसाड जिले का बड़ोदरा गुजरात ग्रामीण बैंक व इनकम टैक्स विभाग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को खुली चुनौती दे रखी है या यूँ कहें कि श्री मोदी जी के कथन को ताक पर रखकर ' मैं खाऊंगा और भ्रष्टाचार करूंगा' की तर्ज पर काम कर रहे हैं।

ऐसे ही वलसाड व वापी के कई मामलों में इनकम टैक्स विभाग का लचीलापन ये दर्शाता है कि कहीं न कहीं इनकम टैक्स विभाग अपने कर्तव्यों का निर्वहन न करते हुए कालाधन रखने वाले व्यापारियों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया है।

इसी तरह वलसाड जिले के नानापोंडा में स्थित बड़ोदरा गुजरात ग्रामीण बैंक के मैनेजर मिस्टर ठाकुर के कार्यकाल में एक ऐसे व्यक्ति को 5 लाख रुपये का लोन का चेक प्रदान कर दिया जो फर्जी तरीके से एक बुजुर्ग महिला के नाम से एकाउंट खुलवा कर कैश कर लिया। इस मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब बैंक वालों ने लोन का किस्त न जमा करने पर उस बुजुर्ग महिला को नोटिस भेज दिया। अब इस मामले को लेकर बैंक के बड़े अधिकारी लीपापोती करने में लगे हुए हैं। एक तरह से देखा जाये तो इस मामले में बैंक अधिकारियों ने बड़ी लापरवाही बरती है या फिर जानबूझकर किसी ऐसे व्यक्ति को लोन का चेक दे दिया जिसके नाम पर लोन पास नहीं हुआ था।

जबकि बैंक अधिकारी लोन का चेक सत्यापन करने के बाद उसी को देते हैं जिसके नाम से लोन पास हुआ हो। इसी तरह एक महीने पहले वलसाड के जाने माने खदान व्यापारी भानुशाली परिवार की 23 वर्षीय पुत्रबधू अपने ससुराल से 98 लाख रूपया कैश व दागीना लेकर फरार हो गई थी। विवाहिता ने अपने मुस्लिम प्रेमी सलमान के साथ दुबई जाने की तैयारी में थी और मुंबई एयरपोर्ट से कलकत्ता व उसके बाद दुबई जाने का प्रोग्राम था। परन्तु खदान व्यापारी भानुशाली की तरफ से वलसाड सिटी पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उन दोनों प्रेमी जोड़ों को मुंबई एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लिया गया। वलसाड व वापी में यह मामला कथित तौर पर एक लव जिहाद के नाम पर गरमाया हुआ था।

जिसमें एक विवाहिता ने घर से 98 लाख रूपए लेकर अपने मुस्लिम प्रेमी के साथ फरार हो गई थी। वलसाड सिटी पुलिस ने अपनी तत्परता दिखाते हुए प्रेमी जोड़े को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया और लड़की द्वारा ले गए 98 लाख रूपयों में से 91 लाख रुपए भी बरामद कर लिए थे । सभी मीडिया वालों ने लगभग एक हप्ते तक लव जिहाद के नाम पर स्टोरी चलाई, परंतु किसी मीडिया वालों के जेहन में ये नहीं आया कि आखिर वलसाड में रहने वाले खदान व्यापारी भानुशाली के पास 98 लाख रुपए कैश कहां से आये ? और इतनी बड़ी रकम अपने घर में क्यों रखा था ? क्या यह कालाधन नहीं था ? अगर यह कालाधन था तो उस समय  इनकम टैक्स विभाग वालों ने तत्काल उन रूपयों को अपने कब्जे में लेकर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की ? आखिर इनकम टैक्स विभाग इस मामले में  इतना लचीला रवैया क्यों अपनाया ?  और यह  98 लाख रूपए का कालाधन सफेद कैसे हो गया ?  खदान व्यापारी भानुशाली ने इनकम टैक्स विभाग को 98 लाख रुपए का हिसाब किताब किस तरह से दिया होगा ? यह वलसाड की जनता के लिए कौतूहल बना हुआ है।

पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर इनकम टैक्स विभाग के अधिकारी व बैंक के अधिकारी अपने आपको हरिश्चन्द्र बनने की कोशिश करते हैं जबकि हकीकत कुछ और ही होता है।

 

    खैर अब यह तो इनकम टैक्स विभाग वाले ही जाने, पर इतना जरूर है कि कोई भी व्यापारी अपने घर में इतना रूपया कैश नहीं रख सकता है। भाई वैसे देखा जाए तो ये तो मोदी जी का गुजरात है, यहां कुछ भी असंभव नहीं है। अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी भले ही भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए कुछ भी बोले और चाहे जितनी बार भी नोटबंदी व जीएसटी लागू कर दें, परंतु जब तक प्रशासनिक विभाग नहीं चाहेगा कि देश से भ्रष्टाचार खत्म हो तब तक यह असंभव सा लगता है।

वैसे देखा जाए तो इनकम टैक्स विभाग एक ऐसा विभाग है जिस पर लोगों को भरोसा रहता है कि यह विभाग बड़ी ही ईमानदारी से अपने काम को अंजाम देते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है अब इस विभाग में भी भ्रष्टाचार की गंध आने लगी है। लोगों की अंगुलियां अब इस विभाग पर भी उठने लगी है। जैसे वलसाड के भानुशाली मामले में इनकम टैक्स विभाग पर अंगुलियां उठ रही है वैसे ही फरवरी महीने में वलसाड के शाहवीर चंद ज्वेलर्स के यहां इनकम टैक्स विभाग द्वारा मारे गए छापे के बाद अब उठने लगी है ।

इस मामले में भी इनकम टैक्स विभाग वालों ने सिर्फ खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास कर रहे हैं। तीन वर्ष पहले शाह वीरचंद गोवन जी प्रा. लि. में एक व्यक्ति ने अपना दागीना बेचा था। उस व्यक्ति को इनकम टैक्स विभाग वालों ने नोटिस जारी कर लिगल दस्तावेज की मांग की थी। इनकम टैक्स के जांच अधिकारी व इंस्पेक्टर जीतेन्द्र कुमार कल्लूराम ने उस व्यक्ति को कहा कि तुम्हारा ट्रांजेक्शन ज्यादा है और 10 से 15 लाख रुपए इनकम टैक्स भरना होगा। जीतेन्द्र कुमार ने इस मामले को रफा दफा करने के लिए 75000 रुपए की मांग की थी जो ए सी वी पुलिस के इंस्पेक्टर सी एम जाडेजा ने रंगे हाथों पकड़ा।

अब जब रक्षक ही भक्षक बन जाये तो इसमें किसी का क्या जोर । अब सवाल यह है कि भानुशाली व शाहवीर चंद मामले में कार्रवाई को लेकर इनकम टैक्स विभाग इतना कमजोर क्यों पड़ रहा है ये तो जांच का विषय है। परन्तु इससे तो यही लगता है कि हमाम में सभी नंगे हैं। अब तो भाजपा सरकार और कांग्रेस सरकार में कोई अंतर नहीं रह गया है। अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ गठबंधनों को सत्ता के अवसरवाद से बचाना है तो इसे सेकुलरवाद बनने से रोकना होगा। कौन कितना सेकुलर है, ये वही लोग तय करते थे, जिन्हें खुद ही कसौटी पर खरा उतरना था। ठीक इसी तरह कौन कितना ईमानदार है, यह तय करने की कोशिश भी वही लोग करेंगे, जिन्हें खुद को मिस्टर क्लीन साबित करना है। अब जागरूक लोगों को भी सावधान रहना होगा, क्योंकि राजनीति के नए गठजोड़ भ्रष्टाचार को दूर करने की बजाय इसे ढंकने का काम करेंगे। जनता अगर भ्रष्टाचार की लड़ाई को नेताओं पर छोड़ देगी तो देशवासियों को बार बार पछताना पड़ेगा।

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