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गांधी के गुजरात में बहती शराब की गंगा, डुबकी लगाते ठेकेदार Featured

Written by  Published in Opinion Wednesday, 21 March 2018 08:22

वापी।। वर्तमान समय में देखा जा सकता है कि जिन राज्यों में शराबंदी लागू की गई है उन राज्यों में आज भी चोरी-छूपे शराब बेची जा रही है। शराब माफिया इतनी ताकतवर है कि शासन-प्रशासन सब फेल है। इसका जीता-जागता उदाहरण आपको गुजरात मॉडल राज्य में जरूर मिल जायेगा। एक तरह से देखा जाए तो गांधी के गुजरात में शराब की गंगा बह रही है। गुजरात के हर शहर में इंग्लिश हो या देशी हर तरह की दारू आपको मिल जायेगी। वलसाड शहर से लेकर वापी के   गुंजन,  जी आई डी सी, मोरारजी सर्कल के पास स्थित कंपनियों के रास्तों पर, आरती इंडस्ट्रियल रोड थर्ड फेस में, छरवाड़ा तथा खोडियार नगर, डूंगरा हद विस्तार के छीरी, गुलाब नगर, रामनगर, चनोद ग्राम पंचायत के आनंद नगर के अंदर के हिस्सों में तथा भड़क मोरा के अंदर व बलिठा गांव के कई हिस्सों में खुलेआम दारू की बिक्री होती है। अगर आप अपना गम भुलाना चाहते हैं या आप दारू पीने के शौकीन हैं तो आपको निम्न पतों पर दारू पीने को जरूर मिल जायेगा। 

डोंट टेक टेंशन आल इस वेल का फार्मूला लागू है। बियर हो या करिम्पी ,रॉयल,  रम हो या विस्की हर तरह के  ब्रांड दमन के होलसेल व्यापारियों का सारा माल की खपत की गॉरंटी। यहां का ऐसा माहौल देखकर तो गुजरात राज्य के लिए ये गाना सटीक बैठता है कि " मुझे पीने का शौक नहीं, पीता हूं गम भुलाने को"। अब सवाल यह है कि गुजरात मॉडल राज्य के लोगों को कौन सा गम सता रहा है ? या शौक के लिए पी रहें हैं ? ये तो ऊपर वाला ही जाने। वैसे सरकार की तरफ से व्यसनमुक्ति केन्द्र व लोगों को मार्गदर्शन के लिए योजनाएं बना रखी जो सिर्फ कागजों पर सिमटकर रह गई है। गुजरात सरकार ने आज तक एक भी गांव व शहर को व्यसनमुक्ति एवार्ड के लिए नहीं चुन पाई है कि जिसे व्यसनमुक्ति एवार्ड से नवाजा जा सके। लेकिन इतना जरूर है कि गुजरात सरकार के ठेकेदारों ने वलसाड व वापी के लोगों के लिए हर तरह का इंतजाम कर रखा है।

अगर आपको एक झटके में ऊपर जाना है तो सुबह सुबह सैर करने के लिए निकल जाइए हाइवे पर तो आपको बुटलेगर लोग बिना कोई झंझट के ऊपर पहुंचा देगें। अगर आपको गम भुलाना है तो थोड़ी थोड़ी पिया करो। और यदि आपको ऊपर जाने की जल्दी है व हर झंझटों से छुटकारा पाना है तो शराब पीकर टुन्न हो जाइए। वैसे देखा जाए तो इस शराब की लत से पीने वालों के साथ साथ उनके परिवार भी बर्बाद हो रहे हैं। परंतु अब सवाल यह है कि इन सबके लिए जिम्मेदार कौन है ? शासन-प्रशासन,  दारू माफिया व बुटलेगर ?

   गौर करने वाली बात यह है कि वलसाड जिला में दारू का हेरा-फेरी  करने वालों बुटलेगरों में से 60% महिलाएं इस धंधे में लिप्त हैं। एक तरफ सरकार महिलाओं के कल्याण व उनके रोजी रोटी के लिए विभिन्न योजनाएं चला रखी है, परंतु ये सब योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गई है। शासन-प्रशासन अगर इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करता तो शायद ये महिलाएं इस दारू के धंधे में नहीं उतरती।

दूसरी बात ये है कि वलसाड जिला में जनसंख्या के आधार पर पुलिस कर्मियों की कमी। इनमें से भी बहुत कम ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जो ईमानदारी के श्रेणी में आते हैं, बाकी का तो बुटलेगर ही बता सकते हैं। अब सवाल यह है कि पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था देखे कि इन बुटलेगरों के पीछे भागे। अब सवाल उठता है एक्साइज विभाग पर कि आखिर यह विभाग कर क्या रहा है जो इतने बड़े पैमाने पर अवैध रूप से दारू की सप्लाई की जा रही है। जो कंपनियां दारू बना रही हैं उसका लेखा जोखा क्या एक्साइज विभाग के पास है ? अगर है तो इतने बड़े पैमाने पर अवैध रूप से दारू की सप्लाई कहां से हो रही है ?

यह चिंता का विषय है। खैर एक्साइज विभाग हो या आबकारी विभाग अपुन का क्या लेना देना, परन्तु डीआईजी साहेब शिवानंद झा जी को तो लेना देना है। क्योंकि शिवानंद झा साहेब दक्षिण गुजरात के रेंज आईजी रह चुके हैं उन्हें तो भलीभांति इन सब चीजों की जानकारी होगी। वैसे तो मेरा मानना है कि गुजरात सरकार को अब एक घोषणा कर देनी चाहिए कि जो भी व्यक्ति व्यसनमुक्ति पाया जायेगा उसे सरकार की तरफ से हर माह हजार रुपये भत्ते के तौर पर दिया जायेगा।

  वर्तमान समय में गुजरात राज्य की पुलिस सड़क और समुद्री मार्ग से शराब तस्करी को रोकने के लिए अथक प्रयास कर रही है। यदा-कदा दारू माफिया व बुटलेगर पुलिस के हत्थे चढ़ भी जाते हैं, परंतु जो दारू के थोक व्यापारी हैं या यूँ कहें कि सबसे बड़े दारू माफिया जो कंटेनर के कंटेनर का खेप दारू बनाने वाली कंपनियों से निकलते हैं, और इतनी बड़ी मात्रा में दारू की खेप कहां जाती है ? क्या एक्साइज विभाग वालों को इसकी जानकारी रहती है ?  वैसे सड़क यातायात के अलावां शराब माफिया रेलवे के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर शराब सप्लाई कर रहे हैं।

वलसाड पैसेंजर व अन्य पैसेंजर ट्रेनों से तो प्रति-दिन वापी से गुजरात के लिए शराब की सप्लाई की जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराबंदी के बावजूद शराब की सप्लाई क्यों की जा रही है ?  ऐसा नहीं है कि शासन-प्रशासन व रेलवे पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है। है परंतु शासन-प्रशासन व रेलवे पुलिस को इसकी कोई चिंता नहीं है। कहीं ऐसा न हो कि रेलवे पुलिस की इस लापरवाही की वजह से किसी दिन कोई  बड़ा हादसा हो जाये । रेलवे व यातायात के माध्यम से की जा रही शराब की सप्लाई से तो मुझे रईस फिल्म की वो सीन याद आती है कि जिसमें शराब माफियाओं ने शराब की जगह आरडीएक्स सप्लाई कर दिए थे और देश धमाकों से थर्रा गया था। रेलवे प्रशासन व पुलिस प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। परन्तु न ही पुलिस प्रशासन और न ही रेलवे प्रशासन इसे गंभीरता से ले रही है।

    कई महीनों पहले  सुप्रीम कोर्ट ने शराब के कारण बढ़ रहे रोड एक्सिडेंट पर लगाम लगाने के लिए आदेश दिया था  कि हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री बंद की जाये। उस समय इस मामले को भी लेकर लोग तर्क लगा रहे थे कि इससे हजारों करोड़ों का नुकसान होगा। परन्तु इस पर कोई नहीं बोला कि शराब की वजह से रोड पर होने वाले एक्सीडेंट से लोग मर रहे हैं तो उनका क्या ? कितने परिवार इस दारू की वजह से बर्बाद हो रहे हैं उनका क्या ? शराब माफिया लॉबी इतनी ताकतवर है कि वह हाईवे पर शराबंदी को ऐसे पेश कर रही थी कि जैसे कोर्ट के इस फैसले से आर्थिक उदारीकरण पर आंच आ जायेगी और देश की पूरी अर्थव्यवस्था ही बिगड़ जायेगी। उस समय मीडिया के सामने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी भी कह चुके हैं  कि शराबंदी से राज्य के रेवेन्यू को कोई नुकसान नहीं होता है। बिहार का रेवेन्यू जितना पहले था, लगभग उतना ही रेवेन्यू अब भी है। उस दौरान राज्य में शराबंदी तो हुई ही, साथ में नोटबंदी भी हुई। नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर रजिस्ट्री आफिस पर पड़ा। इसके बावजूद भी उतना ही रेवेन्यू का आ जाना बड़ी बात थी । नीतीश कुमार जी का यह भी कहना था कि लोगों में यह भ्रम है कि शराबंदी से बिहार को पांच हजार करोड़ के रेवेन्यू का नुकसान हुआ बल्कि शराब पर बिहार की जो जनता हर साल दस हजार करोड़ रुपये की शराब खरीदती थी, उनका पैसा भी बचा और ये पैसा किसी न किसी रूप में टैक्स के रूप में आया। उस समय तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को यहां तक सलाह दे दिया था कि हाईवे की शराब दुकानें इधर-उधर करने की बजाय पूरे देश में ही शराबंदी लागू कर दी जाये।

श्यामजी मिश्रा

 

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