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Religion (98)

 
 
16  मार्च तक चलेगा धार्मिक अनुष्ठान
वलसाड : रोला गांव में विश्व कल्याण और राष्ट्र की सुरक्षा, सुख शांति और समृद्धि के लिए अश्वमेघ महायज्ञ 14 मार्च गुरुवार से शुभारंभ हो रहा है। इसके साथ ही विश्व के सबसे बड़े 5130 किलो के पारद महालिंगम ईच्छापूर्ति पारदेश्वर का स्थापना पर्व एवं अखंड गोरक्ष धुनी के शुभारंभ के साथ पारद श्री साईं बाबा ध्यानमूर्ति के अंशपूजन के लिए 14 मार्च  सुबह 09:45 से पारद महालिंगम और पारद साइंबाबा अंशरस का पूजन एवं पालखी महोत्सव के साथ शोभायात्रा का शुभारंभ होगा। सुबह 11:00 बजे अश्वमेघ यज्ञ महायज्ञ में पारद महालिंगम पारद साईंबाबा अंश रस पूजन का शुभारंभ होगा। जानकारी के अनुसार मश्वमेघ महायज्ञ 14, 15 और 16 मार्च को उपस्थित होकर भव्य पारद महालिंगम स्थापना एवं पारद श्री साईंबाबा अंशपूजन में शामिल होकर  सभी भक्तजनों से ऐसे दुर्लभ एवं अभूतपूर्व स्थापना पर्व का लाभ लेने का आह्वान किया गया है। 
 
दादाश्री 19 बार मानसरोवर और गुरुश्री ने 120 बार की है गिरनार यात्रा
 
दादागुरु फाउन्डेशन के संस्थापक यज्ञमूर्ति दादाश्री 19 बार मानसरोवर की यात्रा कर चुके हैं और ध्यानमूर्ति गुरुश्री ने 120 बार से भी ज्यादा गिरनार की यात्रा की है। दोनों ने यज्ञ और ध्यान के माध्यम से मनुष्य को तनाव मुक्त, रोगमुक्त, नैराश्यमुक्त जीवन जीने का मार्गदर्शन देकर लोगों के भीतर की सकारात्मक ऊर्जा जागृत कर मन की शांति के लिए प्रयास करती है तथा लोगों को कार्यक्षम बनाकर कर्मयोगी बनाने व विश्व कल्याण और लोक कल्याण का प्रयास करती है।
 
यज्ञमूर्ति दादाश्री और ध्यानमूर्ति गुरुश्री का संकल्प
मनुष्य को कर्म का महत्व बताकर संत महंत, योगी, गुरुजन और तज्ञ अनुभवी विद्वान लोगों को आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन से अच्छा कर्म करके दिव्यांग, अनाथ, ज्येष्ठ नागरिकों की सेवा करके मनुष्य को कर्मयोगी बनाने का प्रयास करती है। 
 
दादागुरु फाउन्डेशन का उद्देश्य
दादागुरु फाउन्डेशन का मुख्य उद्देश्य विश्व कल्याण और राष्ट्र की सुरक्षा सुख शांति एवं समृद्धि के लिए शिव गोरक्ष साईंधाम का निर्माण (ध्यानपीठ), विश्व का सबसे बड़ा पारद महालिंगम (ध्यानलिंगम ) और विश्व के सबसे बड़े और पहली बार पारद श्री साईंबाबा ध्यानमूर्ति और अखंड गोरक्ष धुनी (यज्ञकुंड) का निर्माण करना है।
 
दादागुरु फाउन्डेशन का संकल्प
अन्नदान, आरोग्य सेवा, दिव्यांग, ज्येष्ठ नागरिक,अनाथ और देश के लिए शहीद सिपाहियों के परिवार के लिए दादागुरु (डीजी) सेन्टर का आयोजन, जिसमें जीवनोपयोगी वस्तु कम दाम में वितरण और उनके  द्वारा बनाया हुए सामान का वितरण तथा प्रचार और प्रसार करना दादागुरु फाउन्डेशन का संकल्प है।
 
किसानों के लिए योजना
दादागुरु फाउन्डेशन द्वारा आरोग्य और किसानों केलिए भी योजना है जिसके अंतर्गत औषधि वनस्पतियां, नेचरल एवं आर्गनिक फूड का वितरण एवं प्रचार प्रसार शामिल है।
हेल्पलाइन कॉल सेन्टर
दिव्यांग और ज्येष्ठ नागरिकों के लिए आरोग्य, शैक्षणिक, रोजगार, कौशल्य विकास, मनोरंजन, लाइब्रेरी, मार्गदर्शन सेन्टर समेत अनेक सेवाएं व सुविधाएं देने के लिए हेल्पलाइन कोल सेन्टर भी शुरू किया जाएगा।
 
दादागुरु फाउन्डेशन का लक्ष्य
वैदिक प्राचीन परंपरा और पद्धतियों को आधुनिक विज्ञान (मोर्डन साइंस) द्वारा लोगों के सामने लाकर वेद और विज्ञान का समन्वय एवं ेसंशोधन केन्द्रों का निर्माण , लोक कल्याण और विश्व कल्याण दादागुरु फाउन्डेशन का लक्ष्य है।
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दीव 0। दमण-दीव प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल इन दिनों दीव दौरे पर हैं।  महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल ने दीववासियों के साथ गंगेश्वर महादेव के दर्शन किये। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल के साथ उनकी धर्मपत्नी अमी पटेल, सुपुत्र कीथ एवं सुपुत्री किया मौजूद थे। पौराणिक महत्व के गंगेश्वर महादेव देवस्थान की शिवलिंग श्रृंखलाओं का सपरिवार अभिषेक करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल ने दमण-दीव सहित समग्र देश के लोक मंगल की कामना की। फुदम में गुफानुमा जगह में मौजूद गंगेश्वर महादेव स्थान पर पांड़वों और माता कुंती द्वारा स्थापित इन शिवलिंगों पर समुद्रदेव रोज ही जल चढ़ाया करते हैं। जलंधर के बाद पौराणिक महत्व का यह दूसरा स्थल है जहां देश-विदेश के सैलानियों का आना-जाना लगा रहता है।

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मुंबई। सरल गीता परिवार की ओर से मालाड ( पश्चिम ) स्थित श्री साईं मंदिर में महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन किया गया। पं. अजय भट्टाचार्य के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह में धैरप शाह ने संकल्प लिया।इस अवसर पर अग्रोहा विकास ट्रस्ट के संयुक्त मंत्री डॉ. बी. आर. कुमार अग्रवाल, सुनील काबरा, , राजाराम हुरकट, चंद्रशेखर शुक्ल, देवेंद्र शुक्ल, श्यामसुंदर पांडेय, श्यामजी मिश्र आदि उपस्थित रहे। इस अवसर पर कमलेश उपाध्याय हरिपुरी ने भजन प्रस्तुत किया।     
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महाशिवरात्रि पर चार मार्च को 2501 कुंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन, शहीद सैनिकों के परिवारों को 11,111000 की दी जाएगी सहायता राशि --
रमेश तिवारी बलसाड :
राष्ट्रीय सुरक्षा, शांति और समृद्धि के लिए वलसाड तालुका के रोला गांव में दादा गुरु फाउन्डेशन के पूज्य दादाश्री द्वारा महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर सोमवार 4 मार्च 2019 को 2501 कुंडी महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया है। इस अवसर के लिए विश्व का सबसे बड़ा पारद महालिंग का निर्माण किया गया है। इस लिंग के निर्माण में 4500 किलो शुद्ध पारा का उपयोग किया गया है। संपूर्ण संस्कार के साथ हजारों रसों के अभिषेक के साथ इस महाङ्क्षलग को बनाया गया है। शास्त्रों के अनुसार इस शिवलिंग के दर्शन करने मात्र से मनुष्य के कोटि - कोटि पापों का नाश होता है। इस पावन प्रसंग पर दादा गुरु फाउन्डेशन द्वारा शहीद सैनिकों के परिवारों को मंगल कामना के साथ 11, 11000 की सहयोग राशि अर्पित की जाएगी। 
भारत देश की मेधावी शक्ति के लिए सुख, शांति और समृद्धि के लिए पूज्य दादाश्री द्वारा रोला गांव में गत 17 जून 2018 को अश्वमेघ महायज्ञ किया गया था। पूज्य दादाश्री द्वारा वर्ष 2017 में रोला गांव स्थित आश्रम में एक ही स्थान पर एक ही समय 11,111 कुंडी यज्ञ कर इतिहास रचा गया था। पूज्य दादाश्री ने बताया कि उनके साथ गुरुश्री रघुनाथजी भी दादाश्री फाउन्डेशन के संस्थापक हैं और इस फाउन्डेशन के साथ जुड़े हैं। गुरुश्री रघुनाथ जी ने 110 बार पवित्र  गिरनार की यात्रा की है। रोला गांव में 15 वर्ष से संस्था चला रहे पू्ज्य दादाश्री का जीवन चरित्र को जानना भी भक्तों के लिए बहुत जरुरी है। पहले के जमाने में मंदिर नहीं होने पर मात्र यज्ञ के माध्यम से ही मनुष्य अपने कष्टों को दूर कर अपना कल्याण करते थे। भागवत गीता में भी श्रीकृष्ण ने कहा है कि यज्ञ से कष्ट दूर होता है। इसे जीवन में आत्मसात करते हुए पूज्य दादाश्री ने बचपन से ही यज्ञ करवाना प्रारंभ कर दिया था। उन्होंने अब तक साढ़े 12 लाख यज्ञ करवाया है। इसमें 15 से 20 लाख लोगों को हवन में बिठाया गया है। पूज्य दादाश्री के अनुसार यह फाउन्डेशन मानव जीवन के कल्याण मात्र के लिए यज्ञ करता है। 
उन्होंने सभी भाविकभक्तों को महाशिवरात्रि पर्व पर पारद शिवलिंग के दर्शन तथा पूजन का लाभ लेने तथा रोला गांव स्थित संस्था की भेंट का आमंत्रण दिया है। भक्त आश्रम के मोबाइल नंबर 97374 11111 या 97232 50105 पर संपर्क कर सकते हैं।
 
पारद शिवलिंग संसार में सर्वश्रेष्ठ शिवलिंग
पूज्य दादा श्री ने बताया कि हिन्दू शास्त्रों में पारद शिवलिंग की अपरंपार महिमा है। शास्त्रों के अनुसार मिट्टी या पत्थर के शिवलिंग से करोड़ों गुना ज्यादा फल सोना से बने शिवलिंग की पूजा से मिलता है। सोना के शिवलिंग से करोड़ गुना ज्यादा फल स्फटिक मणि (स्फटिक में से बने शिवलिंग) से मिलता है। स्फटिक शिविलंग से करोड़ गुना अधिक फल बाण लिंग नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा से मिलता है। नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा से करोड़ों - करोड़ों गुना फल रसलिंग अर्थात पारा से बने पारद शिवलिंग की पूजा से प्राप्त होता है। पारद शिवलिंग से श्रेष्ठ शिवलिंग संसार में कोई नहीं है।
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१०० अश्वमेघ यज्ञ करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, वह पुण्य पारद शिवलिंग की पूजा तथा दर्शन से करने से प्राप्त होता है।
 
पूज्य दादाश्री ने रोला गांव में निर्माण हुए विश्व के सबसे विशाल पारद महालिंग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि 100 अश्वमेघ यज्ञ करने, करोड़ों गाय को दान करने, एक हजार तोला सोना का दान करने तथा समस्त तीर्थों में स्नान करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, वह पुण्य पारद शिवलिंग की पूजा तथा दर्शन करने मात्र से सहजता से प्राप्त होता है। पृथ्वी पर केदारनाथ, काशी विश्वनाथ समेत समस्त ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से पुण्य मिलता है वह पुण्य पारद शिवलिंग के दर्शन तथा पूजन से मिलता है। हजारों प्रसिद्ध शिवलिंगों की पूजा से जो फल प्राप्त होता है उससे करोड़ गुना फल पारद शिवलिंग की पूजा करने से मिल जाता है।
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पारद शिवलिंग का स्पर्श करने से प्राप्त होता है मोक्ष 
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शास्त्रों में कहा गया है कि महादेव शिव ने स्वयं माता पार्वती जी से कहा है कि पारा को लिंगआकार बनाकर, जो उसका पूजन करते हैं उन्हें जीवन में मृत्यु का भय नहीं रहता है और किसी भी परिस्थिति में उनके घर में गरीबी नहीं आती है। जो व्यक्ति एक बार भी पारद शिवलिंग की विधिवत पूजा करता है उसे सूर्य और चंद्र के रहने तक संपूर्ण सुख प्राप्त होता है। उसके जीवन में धन, यश, मान, पद, प्रतिष्ठा, पुत्र, पौत्र, विद्या, ज्ञान वगैरह की कोई कमी नहीं रहती है तथा अंत में मुक्ति प्राप्त करेगा। पारद शिवलिंग का स्पर्श करने से अवश्य ही मोक्ष मिलता है। यह कथन स्वयं भगवान शिव का है।
 
दादागुरु फाउन्डेशन का उद्देश्य
इस बारे में दादागुरु फाउन्डेशन के पूज्य गुरुश्री ने बताया कि दादागुरु फाउन्डेशन यज्ञ और ध्यान मार्ग से तनाव और निराशा जनक विचार दूर कर लोगों को आनंदमय और सुखमय जीवन की राह दिखाने का काम करता है तथा व्यक्ति को कर्मयोगी बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि दादाश्री फाउन्डेशन का स्लोगन है कि अच्छा कर्म करो, लोकसेवा करो और कर्मयोगी बन कर देश और समाज की सेवा करो। उन्होंने कहा कि 16 मार्च 2019 को दादागुरु फाउन्डेशन रोला में दादागुरु केयर सेन्टर आउटलेट का प्रारंभ करने जा रहा है जिसमें देश के सिपाहियों, स्वतंत्रता सेनानियों तथा दिव्यांगों को अनाज समेत आवश्यक वस्तुएं   टैक्स फ्री दाम पर उपलब्ध रहेगी क्योंकि दादागुरु फाउन्डेशन का सूत्र है - जय जवान, जय किसान और जय दिव्यांग।
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दमण । दमण शहर के खारीवाड़-मिटनावाड़ स्थित सांई बाबा मंदिर का भव्य छठवां पाटोत्सव मनाया गया। सुबह 7.30 बजे मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाई गयी एवं शांति होम किया गया। सुबह 9 बजे से सांई बाबा की पालकी निकाली गयी। जिसमें पूर्व डीएमसपी प्रेसिडेंट एवं वॉर्ड काउंसिलर शौकत मिठाणी ने हर साल की तरह इस साल भी पाटोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान शौकत मिठाणी ने सांई बाबा के दर्शन किये और कंधे पर पालकी उठाकर सांईनाथ की पालकी यात्रा में हिस्सा लिया। पूरे खारीवाड-मिटनावाड में सांई की पालकी घूमी, जिसमें बडी संख्या में श्रद्धालू शामिल हुए। इसके बाद दोपहर एक बजे से महाप्रसाद शुरू हुआ, जिसमें खारीवाड़, मिटनावाड़, वरकुंड़ और आसपास के गांवों के हजारों लोगों ने महाप्रसाद का लाभ लिया। दमण-दीव सांसद लालू पटेल ने भी पाटोत्सव में पहुंचकर सांईनाथ के दर्शन किये। ज्ञात हो कि वर्ष 2013 में शिरडी वाले सांई बाबा की कृपा से मिटनावाड़ के लोगों ने यहां सांईनाथ महाराज का भव्य मंदिर बनवाया था, जिसमें काउंसिलर शौकत मिठाणी का अहम योगदान था। तब से हर साल मंदिर स्थापना तिथि पर धूमधाम से पाटोत्सव मनाया जाता है, जिसमें खारीवाड-मिटनावाड़ के सभी भक्तिभाव से शरीक होते हैं।

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देश के विभिन्न राज्यों जैसे इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद से आमंत्रित लोगो ने इस

कार्यक्रम में हिस्सा लिया और सराहना की

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सूरत: नामदेव छीपा समाज (द.गुजरात) द्वारा हर साल की तरह सूरत में संत नामदेव के ज्ञानोदय दिन के उपलक्ष्य में गोडादरा रोड स्थित आस्तिक पार्टी प्लाट पर वसंत पंचमी उत्सव धामधूम से मनाया गया I सुबह 7.00 से शाम 9.00 बजे तक आयोजित इस कार्यक्रम में पूरे दिन शोभा यात्रा, कलश यात्रा, भजन संध्या, महा आरती, पुरस्कार वितरण, महा प्रसादी जैसे बहुविध कार्यक्रम आयोजित किये गए I वसंत पंचमी उत्सव में सभी छीपा समाज (द.गु.) सहित देश के विभिन्न राज्यों जैसे इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद से आमंत्रित लोगो ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और सराहना की I

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित पुलिस विभाग में रजत पदक विजेता मित्तलबेन कांतिलाल परमार और इंडियन आइडल प्रतियोगिता के द्वितीय रनर अप गौरवजी को सम्मानित किया गया। 

समाज अध्यक्ष फुटरलालजी चौहान, सचिव सुरेश परमार, कोषाध्यक्ष शांतिलाल गहलोतजी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम को अमृतजी, हरीशजी, जगदीशजी, दिनेशजी भाटी, आकाश भाटी, गोविंदजी, रामलालजी, गिरीशजी, मनोजजी गहलोत, मुकेशजी गहलोत, परवीनजी पहाड़िया, अजय नामदेव, भोजराजजी नामदेव, कालूजी, अश्विनजी भाटी, इंद्रमलजी, लोकेशजी, मनीष सोलंकी, दलपतजी, रामनारायणजी, हीरालालजी चौहान, मनोजजी नागर, राजेशजी पिरिया, सुमेरजी पिरिया और गोपालजी नागर ने सफल बनाया।

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नई दिल्ली  : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा विश्व शांति, सदभावना एवं भाईचारा विषय पर आज स्थानीय नेहरू स्टेडियम के सभागार में एक सर्व धर्म स्नेह मिलन का आयोजन हुआ।

यह सार्वजनिक कार्यक्रम ब्रह्मा कुमारी संस्था के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा के पचासवें पुण्य तिथि के अवसर पर, उनके द्वारा वैश्विक शांति,अमन और एकता हेतु की गई त्याग, तप और सेवाओं की स्मृति में, आयोजित किया गया था । इस अवसर पर, अलग अलग धर्मों के धर्म गुरू ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष श्री राम निवास गोयल ने कहा लोग शरीर पर तो ध्यान देते है लेकिन इस शरीर को चलाने वाली आत्मा को बलिष्ठ और विकसित करने पर ध्यान नहीं देते। आत्मा को शक्तिशाली करने का उपाय राजयोग ध्यान अभ्यास ही है। उन्होंने कहा कि लोगों को आज शांति की बहुत जरूरत है। ब्रह्माकुमारी संस्था के सभी केंद्र शांति के स्तंभ है जहां राजयोग द्वारा परमात्मा से शांति प्राप्त की जा सकती है।

ब्रह्मा कुमारी संस्था के मुख्य प्रवक्ता राजयोगी बी के बृजमोहन ने कहा ब्रह्मा एवं ईश्वर दोनों को नई दुनिया का रचयिता कहा जाता है। शास्त्रों में गायन है कि अति धर्म ग्लानि के समय निराकार परमात्मा ने ब्रह्मा तन में अवतरित होकर सत्य ज्ञान एवं राजयोग द्वारा नई दुनिया की स्थापना करते हैं। आज वही समय है जब संसार में चारों ओर धर्म की ग्लानि हो रही है और परमात्मा राजयोग के माध्यम से सतयुग का निर्माण कर रहा है।

कार्यक्रम के मुख्य संयोजिका राजयोगिनी बी के आशा ने कहा कि ब्रह्माकुमारी एक मात्र ऐसी संस्था है जिससे जुड़े लाखों भाई-बहन व्यसन मुक्त है। संस्था से जुड़े लोग बड़ी संख्या में ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। यहां श्रेष्ठ चरित्र और सत्य कर्मों के द्वारा अपने जीवन तथा समाज को बेहतर बनाने की शिक्षा प्रदान की जाती है।

जी.बी.पंत अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मोहित गुप्ता जो कि 33 सालों से ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़े है उन्होंने कहा कि परमपिता परमात्मा की एक ज्ञान बूंद से जीवन मोती जैसा बन जाता है। ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़े युवा राजयोग के माध्यम से अपनी विनाशकारी प्रवृतियों का परिवर्तन कर  विश्व नव निर्माण के कार्य में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि मन की स्वच्छता और स्थिरता जीवन में सफलता हासिल करने के लिए आवश्यक है जो कि राजयोग के अभ्यास से सम्भव है।

ब्रह्माकुमारी संस्था के महिला प्रभाग की अध्यक्षा राजयोगिनी बी0के0चक्रधारी ने कहा कि संस्था के साकार संस्थापक ब्रह्मा ने ईश्वरीय ज्ञान और ध्यान के आधार पर मूलतः महिलाओं को सशक्त किया और इस आध्यात्मिक क्रान्ति के अग्रदूत बनाया। आज उन्हीं की शिक्षाओं के आधार पर विश्व भर में लाखों महिलायें लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहीं हैं।

बहाई धर्म के प्रतिनिधि डॉक्टर ए के मर्चेंट ने कहा कि ब्रह्मा बाबा के अनुसार आज आध्यात्मिक शक्ति को पहचानने की जरूरत है जिससे मानव जाति का उत्थान सम्भव है।

यहूदी धर्म के प्रतिनिध ई आई मालेकर ने कहा कि उन्हें ब्रह्मा बाबा की ये बात सदा याद रहती है कि नर ऐसी करनी करें जो नारायण बने और नारी ऐसी करनी करें जो लक्ष्मी बनें।

सी बी आई के पूर्व निर्देशक पदमश्री डी आर कार्तिकेयन ने भी इस अवसर पर अपने श्रधा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि ब्रह्मा बाबा की शिक्षाएं विश्व शांति, धार्मिक सद्भावना एवं विश्व बंधुत्व को स्थापन करने के लिए अति आवश्यक है।

ब्रह्माकुमारी संस्था के करोल बाग सेवाकेन्द्र निदेशिका बी.के.पुष्पा दीदी ने सामूहिक राजयोग अभ्यास कराते हुए श्रोताओं को गहरी आन्तरिक शान्ति और शक्ति की अनुभूति करायी।

इसके पश्चात ब्रह्मा बाबा के जीवन शिक्षाओं के ऊपर ब्रह्माकुमारी बहनों ने आर्कषक नाटिका प्रस्तुत की। 

 

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अकलेश्वर, 28 दिसम्बर। राष्ट्र-संत चन्द्रप्रभ महाराज ने कहा कि उगता हुआ भाग्य देखना है तो जल्दी जगने की आदत डालें। जो उगता हुआ सूरज देखते हैं उनका भाग्य सदा उदित रहता है, पर डूबते हुए सूरज को देखने वालों का भाग्य भी डूब जाता है। चुटकी लेते हुए संतश्री ने कहा कि भारत में स्कूलें सुबह जल्दी खुलती है अन्यथा आधा भारत 10 बजे तक बिस्तर में ही सोया पड़ा रहता। याद रखें, व्यक्ति ने जब भी कुछ पाया है तो जगकर ही पाया है। सोते-सोते आज तक किसी को कुछ नहीं मिला। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे माता-पिता बच्चों के दुश्मन है जो सूर्योदय के बाद भी बच्चों को बिस्तरों में देखना पसंद करते हैं।
 
संतश्री शुक्रवार को विध्याबेन सोहनलाल गांधी परिवार द्वारा स्वामीनारायण मंदिर हाॅल, जीआईडीसी, पुलिस स्टेशन के पीछे आयोजित दो दिवसीय प्रवचनमाला के समापन पर सैकड़ों भाई-बहनों को संबोधित कर रहे थे। दिन की शुरुआत प्रसन्नता और विनम्रता से करने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि सुबह जल्दी उठने के बाद जो एक मिनट तक मुस्कुरा लेता है वह चैबीस घंटे आनंद में रहता है। व्यक्ति सुबह जब भी उठे आलस्य से नहीं ताजगी के साथ उठें, बिस्तर को समेटकर साइड में रखे, बड़े-बुजुर्गों को श्रद्धापूर्वक घुटने टिकाकर प्रणाम करे। जो माता-पिता के सामने घुटने टिका देता है उसे फिर कभी दूसरों के सामने घुटने टिकाने की नौबत नहीं आती है। प्रणाम करने से दुआएं मिलती है और दुआएं अपने आप में दौलत का काम करती है। फिर व्यक्ति 15 मिनट योगासन, प्राणायाम और ध्यान कर स्वयं को ऊर्जावान बनाए, खुली हवा का सेवन करे, खाली पेट चाय न पिए, नाश्ते में गाय का दूध, फल और ज्यूस ले। उन्होंने गाय पालने की सलाह देते हुए कहा कि आजकल लोगों के घरों में कार व कुत्ते पालने की जगह है, पर गाय पालने की नहीं। एक गाय के हजार फायदे हैं। अगर हर हिंदू और जैन एक-एक गाय का पालन करना शुरू कर दे तो गायों के कत्लखाने अपने आप बंद हो जाएंगे। उन्होंने खान-पान को संयमित करने व मिर्च-मसालेदार-तली हुई चीजों और मिठाइयों से बचने की सलाह दी।
 
समय-प्रबंधन की सीख देते हुए संतप्रवर ने कहा कि 24 घंटों को 25 घंटे करना नामुमकिन है, पर व्यक्ति समय-प्रबंधन करना सीख जाए तो 24 घंटों में 25 घंटों के काम अवश्य कर सकता है। उन्होंने कहा कि हाथ में पहनी जाने वाली घड़ी समय को देखने के लिए नहीं, समय पर चलने के लिए है। रूढे देवता को प्रयत्न करके प्रसन्न किया जा सकता है, पर बीते हुए समय को वापस लौटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कार्यक्रमों में होने वाली लेट-लतीफी व माला, साफे और तिलक की परम्परा को अनुचित बताते हुए कहा कि तीन लोगों को खुश करने के लिए तीन हजार लोगों का समय बर्बाद करना बेबकूफी है। याद रखें, समय उन्ही का साथ निभाता है जो समय पर चलते हैं। व्यक्ति कार्यों की लिस्ट बनाकर समयबद्ध ढंग से कार्य सम्पन्न करे।
 
भाषा शैली का प्रबंधन करें-अंतिम गुर देते हुए संतप्रवर ने कहा कि भाषा ही एक ऐसा साधन है जो औरों के दिल में हमारी जगह बनाती है। हम पहले तौलें, फिर बोलें। प्लीज, थेन्कयू और सॉरी जैसे शब्दों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।
 
इससे पूर्व डाॅ. मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज ने प्रभु प्रार्थना करवाते हुए जीवन में मिलने वाली हर परिस्थिति, वस्तु, व्यक्ति का मुस्कुराकर स्वागत करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि तस्वीर में तो हर कोई मुस्कुराता है, पर सच्चा इंसान वही है जो तकलीफ में भी मुस्कुराता है।
 
कार्यक्रम में गुरुजनों ने गांधी परिवार किया अभिंनदन-इस अवसर पर गुरुजनों ने सत्संग के लाभार्थी दीपक गांधी, दिलीप गांधी, राजेष गांधी, विरल गांधी परिवार को स्फटिक की माला देकर अभिनंदन किया।
 
राष्ट्र-संतों की 2 जनवरी से बड़ौदा में होगी प्रवचनमाला-राष्ट्र-संतों ने सोहन सदन में महामांगलिक देकर बड़ौदा की ओर विहार किया। वे भरूच, पालेज, लकोदरा, करजण होते हुए 2 जनवरी को बड़ौदा पहुंचेंगे जहां उनकी दो दिवसीय विराट प्रवचनमाला का आयोजन होगा। सकल जैन समाज और श्री खरतरगच्छ जैन संघ के तत्वावधान में 2 व 3 जनवरी को राष्ट्र-संतों के सुबह 9 बजे इंद्रपुरी अतिथि गृह, महावीरभवन चार रास्ता, रिलायंस पेटोल पम्प के पास, अजवा रोड़ पर प्रवचन कार्यक्रम आयोजित होंगे।
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अकलेश्वर, 27 दिसम्बर। राष्ट्र-संत ललितप्रभजी महाराज ने कहा कि चिंता, तनाव और
अवसाद भरी सो साल की जिंदगी जीने की बजाय आनंद भरी दस साल की जिंदगी जीना अति
उत्तम है। रोज-रोज न तो मिठाइयाँ खाई जा सकती है और न ही खिलाई जा सकती है, पर
जीवन को तो हमेशा के लिए अवश्य मीठा बनाया जा सकता है। यह तो व्यक्ति पर
निर्भर है कि वह खटास भरी जिंदगी जिए या मिठास भरी। अगर हम बुरे वक्त को याद
करते रहेंगे तो दुखी हो जाएंगे और वक्त का सदूपयोग करना शुरू कर देंगे तो सुखी
हो जाएंगे। उन्होंने क हा कि भगवान रोज धरती पर से एक लाख लोगों को ऊपर उठाता
है, पर उसमें हमारा नंबर नहीं लगाता, वह सबको भूखा उठाता है, पर किसी को भूखा
सुलाता नहीं है और हमें हमारे भाग्य से ज्यादा देता है इसलिए सुबह उठकर उससे
शिकायत या याचना करने की बजाय उसे साधुवाद और धन्यवाद दीजिए।
संतश्री गुरुवार को विध्याबेन सोहनलाल गांधी परिवार द्वारा स्वामीनारायण मंदिर
हाॅल, जीआईडीसी, पुलिस स्टेशन के पीछे आयोजित दो दिवसीय प्रवचनमाला के शुभारंभ
पर सैकड़ों भाई-बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हममें और दूसरे
संतों में ज्यादा फर्क नहीं है। सभी संत स्वर्ग का रास्ता दिखाते हैं, पर
दूसरे संत अगले जन्म में स्वर्ग पाने की बात कहते हैं और हम इसी जन्म को
स्वर्ग बनाते हैं। हमारी बातें न तो आसमान में बने स्वर्ग को पाने की है न ही
पाताल में बने नरक से बचने की है वरन् इसी जीवन में स्वर्ग को पैदा करने की
है। उन्होंने कहा कि जीवन परमात्मा की ओर से मिला हुआ हमें बेशकीमती उपहार है।
हम इसे विषाद नहीं प्रसाद बनाएं। पूनम का चांद उगने वाले आसमान में भी अमावस
की कालिमा आ जाती है अर्थात् विपरीत परिस्थितियां सबके जीवन में आती है इसलिए
व्यक्ति हर परिस्थिति को प्रभु का प्रसाद माने और बदहाल बनकर जीने की बजाय
खुशहाल बनकर जिए।
स्वभाव का सरल बनाएं-जीवन में मिठास घोलने का पहला मंत्र देते हुए संतप्रवर ने
कहा कि स्वभाव को थोड़ा सरल बनाने की कोशिश करें। सरल स्वभाव वाले को पड़ोसन भी
पसंद करती है और कड़वे स्वभाव वाले को घरवाली भी पसंद नहीं करती। अगर आप
गुस्सैल हैं तो घर वाले आपके घर से बाहर जाने पर खुश होंगे और आप शांत हैं तो
घर वाले आपके घर आने पर खुश होंगे सोचो, आप घर वालों को किस तरह खुश रखना
चाहते हैं। उन्होंने शादी करने वाले युवक-युवतियों को सलाह दी कि वे रंग की
बजाय स्वभाव पर ध्यान दें। गुस्सैल पत्नी अगर गौरी भी होगी तो दो दिन अच्छी
लगेगी, पर शांत पत्नी काली भी होगी तो जीवन भर सुख देगी।
रंग की बजाय ढंग से महान बनें-संतप्रवर ने कहा कि व्यक्ति काला है या गौरा,
इसमें न तो उसकी कोई खामी है और न ही कोई खासियत। क्योंकि रंग खुद से नहीं
माँ-बाप से प्राप्त होता है। व्यक्ति रंग को तो बदल नहीं सकता, पर जीवन जीने
के ढंग को बदलकर अवश्य महान बन सकता है। उन्होंने कहा कि गौरे लोग दिन में दस
बार आइना जरूर देखें और प्रेरणा लें कि जैसा मेरा रंग है मैं काम भी उतने ही
सुंदर करूंगा और काले लोग दिन में बीस बार आइना देखें और सोचें कि भगवान ने
चेहरा सुंदर नहीं दिया तो क्या हुआ मैं काम बहुत सुंदर करूंगा और दुनिया में
महान बनूंगा।
ज्यादा सिरपच्चियाँ न पालें-मिठास घोलने का दूसरा मंत्र देते हुए संतप्रवर ने
कहा कि बूढ़े लोग घर में इसलिए दुखी रहते हैं कि वे बेवजह की सिरपच्चियाँ मोल
लेते रहते हैं। अगर बड़े-बुजुर्ग टोकाटोकी करना बंद कर दे तो दुनिया में ऐसा
कोई भी बेटा-बहू नहीं है जो माँ-बाप से अलग घर बसाकर रहना चाहे। उन्होंने
सासुओं से कहा कि वे जितना ध्यान बहुओं का रखती है अगर उतना ध्यान भगवान का
रखना शुरू कर दे तो उन्हें मोक्ष मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि हमसे तो वे पंछी
कही ज्यादा अच्छे हैं तो पंख लगते ही बच्चों को खुला छोड़ देते हैं, पर हम
जीवनभर बच्चों की सिरपच्चिया करते रहते हैं। जिंदगी की गणित बताते हुए
उन्होंने कहा कि हम सोमवार को जन्में, मंगल को स्कूल गए, बुध को बड़े हुए, गुरू
को शादी हुई, शुक्र को बच्चे हुए, शनि को बीमार पड़े और रवि को राम-राम सत् हो
गया। हमारी इतनी तो छोटी-सी जिंदगी है फिर हम क्यों व्यर्थ की माथाफोडियों में
हाथ डालते रहते हैं।
खुश रहने की आदत डालिए-मिठास घोलने का तीसरा मंत्र देते हुए संतप्रवर ने कहा
कि इच्छाएं कम कीजिए और इच्छाशक्ति बढ़ाने की कोशिश कीजिए ताकि हम आगे बढ़ सकें।
उन्होंने युवाओं से कहा कि आपको जिंदगी में जो पसंद है उसे हासिल कीजिए और
बुजुर्ग लोग जो हासिल है उसे पसंद करना शुरू कर दे तो ज्यादा ठीक रहेगा।
उन्होंने कहा कि आपके पास मकान है, बैंक बेलेंस है, वाइकल है, पत्नि है फिर भी
आप दुखी हैं और मेरे पास कुछ भी नहीं है फिर भी मैं सुखी हूँ। सुख का राज इतना
सा है कि अगर हमारे पास केवल झौपड़ी है तो भी खुश रहें कि क्योंकि कइयों के पास
तो छत भी नहीं है और कभी पाँवो में जूते भी न रहे ऐसी नौबत आ जाए तो भी हर हाल
में खुश रहना क्योंकि दुनिया में लाखों लोग ऐसे हैं जिनके पास पाँव ही नहीं है।
मुस्कान को बनाए रखे-मिठास घोलने का अंतिम मंत्र देते हुए संतप्रवर ने कहा कि
सदा मुस्कुराते हुए जिएं। जो मुस्कुराता है समझना वो जिंदा है अन्यथा जिंदा
आदमी भी मुर्दे से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि हम मात्र दो सेकण्ड मुस्कुराते
हैं तो फोटो सुंदर आता है सोचो अगर हम हर पल मुस्कुराएंगे तो जिंदगी कितनी
सुंदर बन जाएगी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे सदा
मुस्कुराने की आदत डाल लें। अगर यहाँ का हर व्यक्ति मुस्कुराते हुए जिएगा तो
यह शहर शहर नहीं रहेगा हँसता-मुस्कुराता हुआ गुलाब का फूल बन जाएगा।
इससे पूर्व राष्ट्र-संत चन्द्रप्रभ महाराज, राष्ट्र-संत ललितप्रभ महाराज और
डाॅ. मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज के नगर आगमन पर मानव मंदिर स्थित चंपानगरी
जैन तीर्थ से सामैया का आयोजन किया गया जो सोहन सदन पहुंचा जहां गुरुजनों का
गांधी परिवार द्वारा भव्य स्वागत किया गया। गुरुजन महामांगलिक देकर स्वामी
नारायण मंदिर हाॅल पहुंचे जहां सत्संग प्रवचन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में
दीपक गांधी, दिलीप गांधी, राजेश गांधी, विरल गांधी, श्रीमती दुर्गा गांधी आदि
अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।
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यह दिक्षाथीँ के उपलक्ष में 24/12/18 को भिलाड "जैन संघ" द्वारा मुमुक्षु तान्या का  वर्षीदान वरघोडा आचार्यश्री यशोवमॉ सुरीश्वरजी म.सा और गच्छाधिपति आचार्यश्री धर्म धुरंधर महाराज साहेब की नीश्रा में सुबह 10/00 बजे जैन दहेरासर से बगीरथ में भव्य बैंडवाझा की पार्टी के साथ  दिक्षाथीँ अमर रहो  नारे के साथ संसार की सुखमय जिंदगी त्याग का वर्षीदान करते हुए वरघोडा गांव में निकला। 
यह मुमुक्षु दिक्षाथीँ के लिए बाद में  बहुमान पत्र  का कार्यक्रम जैन उपाश्रय में गुरु भगवंत और जैन समाज के सभी सदस्यों की उपस्थिति में कीया गया है।
बाद में जितेंद्रभाई की और से संध स्वामि वात्सल्य का लाभ सभी मेहमानों के साथ गांव के लोगों के लिये रखा गया था
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