Crime (36)

 
दमण। कोस्टल पुलिस ने देशी कट्टा बेचने जा रहे एक युवक को बीच राह में ही धर दबोचा। चला निवासी निकेश श्रवण राठौड़ किसी को कट्टा बेचने निकला था। वो होटल जजीरा के पास पहुँचा ही था कि पुलिस की लपेट में आ गया। उसके हथियार बेचने निकलने की भनक पुलिस को लग गयी थी। एसएचओ सोहिल जिवाणी ने फौरन पीएसआई धर्मेश धोड़ी, हेडकांस्टेबल कृष्ण विजय गोहिल,सुमित भक्ति,जिग्नेश पटेल,अमित वाजपेई की टीम ऑपरेशन पर लगा दी। पुलिस को खबर मिली थी कि बाइक GJ 15 BR 2039 लेकर एक युवक देवका रोड से कड़ैया की तरफ देशी कट्टा बेचने निकला है। फौरन ही होटल जजीरा के पास चेकिंग शुरू हुई। तभी बताये हुए बाइक के साथ एक युवक वहाँ पहुँचा। तलाशी के दौरान उसके बैग से एक अदद देशी कट्टा बरामद हुआ। तलाशी में युवक के पास से वीवो वी-9 मोबाइल भी मिला। साथ ही उक्त मोटरसाइकिल भी पुलिस ने बरामद की। पूछताछ में युवक ने कबूला कि वो कट्टा बेचने को लेकर जा रहा था कि तभी पकड़ लिया गया। आरोपी की पहचान निकेश श्रवण राठौड़,21 वर्ष,403,पार्श्वदर्शन अपार्टमेंट,अपना घर सोसायटी,चला,वापी के रूप में हुई,जो कि मजदूरी का काम करता है। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर 4 दिन की रिमांड पर लिया है और आगे की पूछताछ में जुटी है।
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सिलवासा  । संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली में पिछले कई वर्षों से स्टील प्लांट्स की फैक्ट्रियों में मासूम श्रमिक अपनी जान गवां रहे हैं। हर बार प्रशासन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रक्रिया चलाती है और हर बार कंपनी संचालक बच निकलते हैं। इन सबके बीच प्रशासन न तो कंपनियों में सुरक्षा ऑडिट कराती है और ना ही कंपनी संचालकों के उपर सुरक्षा मानदंडों के लिए कोई गाइडलाइन तय करती है। प्रशासन की इसी बेरुखी के कारण आज एक बार फिर तीन श्रमिकों ने अपनी जान गवां दी और कई घायल हुए। घटना नरोली के श्री कृष्णा स्टील प्लांट का है जहां पर सुबह तड़के ब्लास्ट हुआ और इस घटना में कंपनी में काम कर रहे श्रमिकों के परखच्चे उड़ गए। घटना की सूचना मिलने के बाद उपजिला अधिकारी डॉ. राकेश कुमार मिन्हास घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने न सिर्फ घटना का मुआयना लिया बल्कि उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में भी प्रशासन की एजेंसियों को लगाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और 3 लोग अपनी जान गवां चुके थे और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। सिलवासा पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी में बताया गया है कि नरोली विस्तार स्थित स्टील बनाने वाली कंपनी श्री कृष्णा स्टील प्रोडक्ट्स कंपनी में अचानक जोरदार ब्लास्ट होने से तीन श्रमिकों की स्थल पर ही मौत हो गयी। वहीं कई अन्य घायल हो गये। जिसमें दो श्रमिकों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, श्री कृष्णा स्टील प्रोडक्ट्स कंपनी में जोरदार धमाका होने से अफरा-तफरी मच गयी। इस ब्लास्ट में भट्ठी के पास काम कर रहे राजकुमार रामबली बुनकर (26)निवासी सतना-मध्य प्रदेश, तिलकराम नानू यादव (19) निवासी बहराइच-यूपी एवं विजय रामकृपाल बुनकर (20) निवासी सतना-मध्य प्रदेश की मौके पर ही मौत हो गयी। वहीं कई अन्य लोग हादसे में झुलस गये, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रदीप मुंसी यादव (18) निवासी बहराइच-यूपी एवं राजाराम रामबली बुनकर (19) निवासी सतना-मध्य प्रदेश की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों का इलाज सिलवासा के विनोबा भावे सिविल अस्पताल में चल रहा है। ब्लास्ट होने के कारणों का पता नहीं चल सका है। घटना बुधवार की देर रात की बताई जा रही है। बुधवार तड़के करीब 3 बजे यह हादसा हुआ है। इसकी जानकारी होते ही सिलवासा पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरु कर दी है। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि कंपनी के कई जगहों से खरपच्चे भी निकल गए है। इस कंपनी के मालिक अंकुर अग्रवाल है। इसके मैनेजर ओमप्रकाश सिंह जो अवकाश पर है। इस घटना के संदर्भ में सिलवासा पुलिस ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  
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भिलाड के नंदीगाम श्री सिमंध्धर जैन मंदिर पेढी से चोरी हुआ चांदी का श्रीफल कलश के चोरी करने वाले चोर को पकड़कर चोरी हुए मुद्दे माल को बरामद किया गया था। 
जो चांदी का श्रीफल कलश कोर्ट के ओडर से छुड़ाने के बाद भिलाड पुलिस स्टेशन से भिलाड PSI ए.डी.मियात्ररा साहब ने परत पेढी के टस्टी श्री बसंतभाई शाह (बकुलभाई) को सुपरत कीया।
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दमण । दमण पुलिस ने दमण-दीव कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल को हप्तावसूली मामले में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जहां पर उन्हें कोर्ट द्वारा 1 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है। संघ प्रदेश दमण-दीव-दानह डीआईजीपी बी. के. सिंह ने दमण पुलिस मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर इसकी जानकारी दी है। डीआईजीपी बी. के. सिंह बताया कि वेलनॉन पोलिस्टर्स लिमिटेड दमण की ओर से राकेश गोयल ने 11 सितंबर को मामला दर्ज कर बताया कि जागृति वाटर सप्लाई एवं केतन पटेल द्वारा उनसे धन की उगाही की जा रही है। इस संदर्भ में दमण पुलिस ने केतन पटेल के खिलाफ आईपीसी की धारा 386, आर/डब्ल्यू 34 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरु की। पुलिस ने जांच के दौरान 12 सितंबर को केतन पटेल के घर जाकर इस मामले में सहयोग देने के लिए उनके घर पर नोटिस चिपकाई। जिसमें 14 सितंबर को नानी दमण पुलिस थाने में हाजिर होने के लिए कहा गया था। लेकिन केतन पटेल पुलिस थाने में हाजिर नहीं हुए, जिससे साफ जाहिर होता है कि केतन पटेल पुलिस के साथ लुका-छिपी खेल रहे है। वहीं केतन पटेल ने दमण सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी हुई थी, जिस पर कोर्ट द्वारा सुनवाई के लिए 31 सितंबर का समय दिया गया था। गणपति पूजा करके हुए केतन पटेल की तस्वीर विभिन्न अखबारों में देखी गयी। जिसके बाद पुलिस की टीम ने केतन पटेल के लोकेशन को ढूंढना शुरु कर दिया, इसी दौरान केतन पटेल का लोकेशन मुंबई पाया गया। इसी के आधार पर पुलिस की एक टीम गठित की गयी। एसडीपीओ रविन्द्र शर्मा एवं थाना प्रभारी पंकेश टंडेल के नेतृत्व में पीएसआई धनजी, कांस्टेबल भूषण मांगेला, संडिल एवं होमगार्ड विजय को मुंबई भेजा गया। दमण पुलिस की टीम ने मुंबई पुलिस के सहयोग से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केतन पटेल को नरीमन पोइंट से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस केतन पटेल को दमण लेकर आयी और आज कोर्ट में पेश किया। कोर्ट द्वारा केतन पटेल को 1 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया है। डीआईजीपी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने जून 2017 से केतन पटेल को 2 लाख रुपये हर महीने देने की बात अपने शिकायत में की है। वहीं जनवरी 2017 से जागृति वोटर सप्लाई को हर महीने 5 लाख रुपये देने की भी बात शिकायत में कही गयी है। डीआईजीपी ने बताया कि केतन पटेल के खिलाफ और भी मामले दर्ज है, जिसकी हम जांच कर रहे है। इस मामले में आगे की जांच जारी है। इस प्रेस कांफ्रेंस में एसपी विक्रमजीत सिंह भी मौजूद रहे। 
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26 दिन से एक मुस्लिम महिला अपने पति का पता लगाने व FIR दर्ज कराने के लिए दौड़ रही है 

गुजरात के कच्छ जिल्ले के भुज शहर में 26 दिन पहले 19 जुलाई 2018 रात को 9 बजे मजीद थेबा के घर में पुलीस जाती है और वहां मियां बीवी खाना खा रहे होते है तभी पुलीस बोलती है ये मजीद का घर है उनहो ने कहा जी हां साहेब ये मजीद का घर है फिर क्या था पोलीस गाली गलौच करती है फिर मजीद के साथ मारपिट करती हे यही तक नही रुकती फिर मजीद की गर्भवती बीवी को भी मारती है गर्भवती बीवी को पेट मे चोट लगने से दर्द होता है जिस से पुलिस उस को ऑटो रिक्शा से सिविल हॉस्पिटल भेज देती है और फिर रात को 2 बजे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवा कर पुलीस उसकी बीवी को फिर से पुलिस स्टेशन बुलाती है। फिर उस औरत को घर भेज दिया जाता है और जब वो घर पहुँचती  है तो उस का पति गायब होता है| उसकी पत्नी आशियाना थेबा नें ज़िले के एस.पी, कलेक्टर साहेब को लिखित मे फरियाद की जिस में एक पोलीस वाले का नाम भी होता है उस पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी। पुलिस जो कूड़े के ढेर से सुई ढूंढ लाती है इस मामले में इतनी लापरवाही क्यों? क्या वो मुसलमान है इसलिए उसको ढूँढने में पुलिस हीला हवाली कर रही है|

मजीद थेबा को ढूँढने व उसकी पत्नी आशियाना थेबा की FIR दर्ज करने के लिए माइनॉरिटी कोआर्डिनेशन कमेटी गुजरात के कन्वेनर मुजाहिद नफ़ीस नें पुलिस महानिदेशक महोदय, गृह राज्य मंत्री महोदय व मुख्य सचिव महोदय गुजरात को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है|

अगर FIR दर्ज नहीं हुई तो माइनॉरिटी कोआर्डिनेशन कमेटी पूरे राज्य में आन्दोलन,धरना प्रदर्शन करेगी ताकि गुजरात के मुसलमानों को उनके नागरिक अधिकार मिल सकें|

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अहमदाबाद। राज्य सरकार की खेत तलावड़ी योजना में सूरत की महुवा, मांडवी, मांगरोल तहसील में 20.52 लाख रूपए के भ्रष्टाचार के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधी शाखा ने 11 के खिलाफ आरोप दाखिल कर छह सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार दो अधिकारियों के घर से नकदी तथा निवेश के कागजात भी बरामद हुए हैं।

गत दिनों सूरत ग्रामीण भ्रष्टाचार निरोधी ब्यूरो ने सूरत जिले की महुवा, मांडवी और मांगरोल तहसील में खेत तलावड़ी न बनाकर 20.52 लाख के भ्रष्टाचार में सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और ठेकेदार सहित कुल 11 के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में शनिवार को एसीबी ने तत्कालीन सहायक क़ृष्णकुमार गोरेलाल, सहायक निदेशक संतोष विनायक राव परुलकर, क्षेत्रीय सहायक तुलसी गगाभाई चौधरी तथा तत्कालीन सहायक अमरसिंह फतेसिंह डोडिया को गिरफ्तार कर लिया। इसी दौरान तत्कालीन सहायक निदेशक खेंगार केशनर गढवी और फील्ड आसिस्टैंट बाबूलाल प्रभूदास पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया।

एसीबी ने खेंगार गढवी के महेसाणा स्थित आवास से 4.60 लाख रूपए नकद तथा एफडी, जमीन, मकान और प्लाट के कागजात बरामद कर लिए। तत्कालीन सहायक निदेशक कृष्णकुमार उपाध्याय के बड़ौदा स्थित मकान से 36 लाख रूपए मूल्य की वस्तुएं बरामद हुई हैं। 

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वापी।  वापी शहर में शराब माफियाओं की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दारू बंदी होने के बावजूद बेखौफ होकर वापी शहर व गांवों में दारू की सप्लाई करते हैं। वापी शहर इंडस्ट्रियल एरिया है जिनमें लाखों की संख्या में कामगार काम करते हैं, परन्तु शाम होते ही ये कामगार अपनी थकान मिटाने के लिए वापी के गुंजन, जी आई डी सी, मोरारजी सर्कल के पास स्थित कंपनियों के रास्तों पर, आरती इंडस्ट्रियल रोड थर्ड फेस में, छरवाड़ा तथा खोडियार नगर, डुंगरा हद विस्तार के छीरी, गुलाब नगर, रामनगर, चनोद ग्राम पंचायत के आनंद नगर के हिस्सों में तथा भड़क मोरा के अंदर व बलिठा गांव के कई हिस्सों में दारू पीने के लिए चल देते हैं।

कई पियक्कड़ ऐसे होते हैं जो रात भर इन रास्तों पर लुढ़के मिल जायेंगे। वैसे वर्तमान समय में देखा जा सकता है कि जिन राज्यों में शराबंदी लागू की गई है उन राज्यों में आज भी चोरी-छूपे शराब बेची जा रही है। शराब माफिया इतनी ताकतवर है कि शासन-प्रशासन सब फेल है। इसका जीता-जागता उदाहरण आपको गुजरात मॉडल राज्य में जरूर मिल जायेगा। एक तरह से देखा जाए तो गांधी के गुजरात में शराब की गंगा बह रही है। गुजरात के हर शहर में इंग्लिश हो या देशी हर तरह की दारू आपको मिल जायेगी। वलसाड शहर से लेकर वापी के गुंजन, जी आई डी सी, मोरारजी सर्कल के पास स्थित कंपनियों के रास्तों पर, आरती इंडस्ट्रियल रोड थर्ड फेस में, छरवाड़ा तथा खोडियार नगर, डूंगरा हद विस्तार के छीरी, गुलाब नगर, रामनगर, चनोद ग्राम पंचायत के आनंद नगर के अंदर के हिस्सों में तथा भड़क मोरा के अंदर व बलिठा गांव के कई हिस्सों में खुलेआम दारू की बिक्री होती है।

अगर आप अपना गम भुलाना चाहते हैं या आप दारू पीने के शौकीन हैं तो आपको निम्न पतों पर दारू पीने को जरूर मिल जायेगा।  डोंट टेक टेंशन आल इस वेल का फार्मूला लागू है। बियर हो या करिम्पी ,रॉयल,  रम हो या विस्की हर तरह के  ब्रांड दमन के होलसेल व्यापारियों का सारा माल की खपत की गॉरंटी। यहां का ऐसा माहौल देखकर तो गुजरात राज्य के लिए ये गाना सटीक बैठता है कि " मुझे पीने का शौक नहीं, पीता हूं गम भुलाने को"। अब सवाल यह है कि गुजरात मॉडल राज्य के लोगों को कौन सा गम सता रहा है ? या शौक के लिए पी रहें हैं ? ये तो ऊपर वाला ही जाने।

वैसे सरकार की तरफ से व्यसनमुक्ति केन्द्र व लोगों को मार्गदर्शन के लिए योजनाएं बना रखी जो सिर्फ कागजों पर सिमटकर रह गई है। गुजरात सरकार ने आज तक एक भी गांव व शहर को व्यसनमुक्ति एवार्ड के लिए नहीं चुन पाई है कि जिसे व्यसनमुक्ति एवार्ड से नवाजा जा सके। लेकिन इतना जरूर है कि गुजरात सरकार के ठेकेदारों ने वलसाड व वापी के लोगों के लिए हर तरह का इंतजाम कर रखा है। अगर आपको एक झटके में ऊपर जाना है तो सुबह सुबह सैर करने के लिए निकल जाइए हाइवे पर तो आपको बुटलेगर लोग बिना कोई झंझट के ऊपर पहुंचा देगें। अगर आपको गम भुलाना है तो थोड़ी थोड़ी पिया करो। और यदि आपको ऊपर जाने की जल्दी है व हर झंझटों से छुटकारा पाना है तो शराब पीकर टुन्न हो जाइए। वैसे देखा जाए तो इस शराब की लत से पीने वालों के साथ साथ उनके परिवार भी बर्बाद हो रहे हैं। परंतु अब सवाल यह है कि इन सबके लिए जिम्मेदार कौन है ? शासन-प्रशासन, दारू माफिया व बुटलेगर ?

   गौर करने वाली बात यह है कि वलसाड जिला में दारू का हेरा-फेरी  करने वालों बुटलेगरों में से 60% महिलाएं इस धंधे में लिप्त हैं। एक तरफ सरकार महिलाओं के कल्याण व उनके रोजी रोटी के लिए विभिन्न योजनाएं चला रखी है, परंतु ये सब योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही सिमट कर रह गई है। शासन-प्रशासन अगर इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करता तो शायद ये महिलाएं इस दारू के धंधे में नहीं उतरती। दूसरी बात ये है कि वलसाड जिला में जनसंख्या के आधार पर पुलिस कर्मियों की कमी। इनमें से भी बहुत कम ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जो ईमानदारी के श्रेणी में आते हैं, बाकी का तो बुटलेगर ही बता सकते हैं।

अब सवाल यह है कि पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था देखे कि इन बुटलेगरों के पीछे भागे। अब सवाल उठता है एक्साइज विभाग पर कि आखिर यह विभाग कर क्या रहा है जो इतने बड़े पैमाने पर अवैध रूप से दारू की सप्लाई की जा रही है। जो कंपनियां दारू बना रही हैं उसका लेखा जोखा क्या एक्साइज विभाग के पास है ? अगर है तो इतने बड़े पैमाने पर अवैध रूप से दारू की सप्लाई कहां से हो रही है ? यह चिंता का विषय है। खैर एक्साइज विभाग हो या आबकारी विभाग अपुन का क्या लेना देना, परन्तु डीआईजी साहेब शिवानंद झा जी को तो लेना देना है।

क्योंकि शिवानंद झा साहेब दक्षिण गुजरात के रेंज आईजी रह चुके हैं उन्हें तो भलीभांति इन सब चीजों की जानकारी होगी। वैसे तो मेरा मानना है कि गुजरात सरकार को अब एक घोषणा कर देनी चाहिए कि जो भी व्यक्ति व्यसनमुक्ति पाया जायेगा उसे सरकार की तरफ से हर माह हजार रुपये भत्ते के तौर पर दिया जायेगा।

  वर्तमान समय में गुजरात राज्य की पुलिस सड़क और समुद्री मार्ग से शराब तस्करी को रोकने के लिए अथक प्रयास कर रही है। यदा-कदा दारू माफिया व बुटलेगर पुलिस के हत्थे चढ़ भी जाते हैं, परंतु जो दारू के थोक व्यापारी हैं या यूँ कहें कि सबसे बड़े दारू माफिया जो कंटेनर के कंटेनर का खेप दारू बनाने वाली कंपनियों से निकलते हैं, और इतनी बड़ी मात्रा में दारू की खेप कहां जाती है ? क्या एक्साइज विभाग वालों को इसकी जानकारी रहती है ? 

वैसे सड़क यातायात के अलावां शराब माफिया रेलवे के माध्यम से भी बड़े पैमाने पर शराब सप्लाई कर रहे हैं। वलसाड पैसेंजर व अन्य पैसेंजर ट्रेनों से तो प्रति-दिन वापी से गुजरात के लिए शराब की सप्लाई की जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराबंदी के बावजूद शराब की सप्लाई क्यों की जा रही है ?  ऐसा नहीं है कि शासन-प्रशासन व रेलवे पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है। है परंतु शासन-प्रशासन व रेलवे पुलिस को इसकी कोई चिंता नहीं है। कहीं ऐसा न हो कि रेलवे पुलिस की इस लापरवाही की वजह से किसी दिन कोई  बड़ा हादसा हो जाये । रेलवे व यातायात के माध्यम से की जा रही शराब की सप्लाई से तो मुझे रईस फिल्म की वो सीन याद आती है कि जिसमें शराब माफियाओं ने शराब की जगह आरडीएक्स सप्लाई कर दिए थे और देश धमाकों से थर्रा गया था। रेलवे प्रशासन व पुलिस प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। परन्तु न ही पुलिस प्रशासन और न ही रेलवे प्रशासन इसे गंभीरता से ले रही है।

    कई महीनों पहले  सुप्रीम कोर्ट ने शराब के कारण बढ़ रहे रोड एक्सिडेंट पर लगाम लगाने के लिए आदेश दिया था  कि हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की बिक्री बंद की जाये। उस समय इस मामले को भी लेकर लोग तर्क लगा रहे थे कि इससे हजारों करोड़ों का नुकसान होगा।

परन्तु इस पर कोई नहीं बोला कि शराब की वजह से रोड पर होने वाले एक्सीडेंट से लोग मर रहे हैं तो उनका क्या ? अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में जहीरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत हो गई और कितने परिवार इस दारू की वजह से बर्बाद हो रहे हैं उनका क्या ? शराब माफिया लॉबी इतनी ताकतवर है कि वह हाईवे पर शराबंदी को ऐसे पेश कर रही थी कि जैसे कोर्ट के इस फैसले से आर्थिक उदारीकरण पर आंच आ जायेगी और देश की पूरी अर्थव्यवस्था ही बिगड़ जायेगी। उस समय मीडिया के सामने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी भी कह चुके हैं  कि शराबंदी से राज्य के रेवेन्यू को कोई नुकसान नहीं होता है। बिहार का रेवेन्यू जितना पहले था, लगभग उतना ही रेवेन्यू अब भी है। उस दौरान राज्य में शराबंदी तो हुई ही, साथ में नोटबंदी भी हुई।

नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर रजिस्ट्री आफिस पर पड़ा। इसके बावजूद भी उतना ही रेवेन्यू का आ जाना बड़ी बात थी । नीतीश कुमार जी का यह भी कहना था कि लोगों में यह भ्रम है कि शराबंदी से बिहार को पांच हजार करोड़ के रेवेन्यू का नुकसान हुआ बल्कि शराब पर बिहार की जो जनता हर साल दस हजार करोड़ रुपये की शराब खरीदती थी, उनका पैसा भी बचा और ये पैसा किसी न किसी रूप में टैक्स के रूप में आया। उस समय तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को यहां तक सलाह दे दिया था कि हाईवे की शराब दुकानें इधर-उधर करने की बजाय पूरे देश में ही शराबंदी लागू कर दी जाये।

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नई दिल्ली। दिल्ली में घरेलू नौकरानी के तौर पर काम करने वाली एक 16 साल की लड़की की बर्बरता से हत्या किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लड़की को झारखंड से नौकरी का झांसा देकर लाया गया था, लेकिन जब उसने सैलरी मांगी तो उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि लड़की को झारखंड से बहकाकर लाने वाले व्यक्ति ने ही उसकी हत्या की है। पुलिस ने बताया कि 4 मई को मियावली इलाके से ही एक नाले से बोरे में भरकर फेंकी गई लड़की की लाश बरामद हुई थी। लड़की की लाश के तीन टुकड़े कर दिए गए थे।

 गिरफ्तार हत्यारोपी की पहचान मंजीत कारकेटा के तौर पर हुई है। मंजीत ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कुबूल कर लिया है। उसने बताया कि लड़की की हत्या में उसके अलावा दो और लोग भी शामिल थे, जिनमें से एक महिला है। पुलिस ने बताया कि हत्यारोपी ने स्वीकार किया है कि तीनों अच्छी नौकरी का झांसा देकर झारखंड से गरीब लड़कियों को फंसाते थे। मृत लड़की को करीब तीन साल पहले वे बहकाकर झारखंड से दिल्ली ले आए थे और यहां उसे घरेलू नौकरानी का काम दिलवाया था। लेकिन वे लड़की की सैलरी खुद ही रख लेते थे। आखिरकार तंग आकर लड़की 3 मई को कारकेटा के पास अपनी सैलरी मांगने पहुंची तो कारकेटा और उसके दो अन्य साथियों ने मिलकर लड़की की हत्या कर दी। हत्या करने के बाद उन्होंने लड़की की लाश के तीन टुकड़े कर बोरे में भरकर नाले में फेंक दिया।

 लड़की की लाश मिलने के बाद से ही पुलिस हत्यारोपी की तलाश में जुटी हुई थी। पुलिस ने घटनास्थल के आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और इलाके के करीब 200 घरों में पूछताछ की। इस दौरान पुलिस को पता चला कि एक घर में किराए पर रहने वाली एक लड़की उसी दिन से गायब है, जिस दिन नाले से लाश मिली थी। पुलिस को जब पता लगा कि गायब लड़की झारखंड की रहने वाली थी, तो पुलिस झारखंड उसके गांव जा पहुंची। हालांकि झारखंड में भी पुलिस के हाथ हत्यारोपी नहीं लगे। इस बीच पुलिस को पता चला कि एक व्यक्ति 17 मई को दिल्ली में गायब लड़की के किराए के मकान पर आने वाला है। पुलिस ने जाल बिछाकर हत्यारोपी को गिरफ्तार कर लिया।

 

 

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उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में एक प्रेमी जोड़ा द्वारा फांसी लगाकर खुदकुशी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। रविवार की सुबह जब गांव वालों की नींद खुली तो पेड़ पर गांव के ही एक युवक और एक युवती की लाश लटकी देख सभी के होश उड़ गए। तत्काल पुलिस को सूचित किया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि प्राथमिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग में खुदकुशी का लग रहा है। दोनों युवक और युवती उसी गांव के रहने वाले हैं।

पुलिस ने मृतक प्रेमी जोड़े की पहचान 19 वर्षीय यशोदा उर्फ मंडोला और 24 वर्षीय विद्यासागर के रूप में की है। पुलिस ने बताया कि फांसी लगाने से पहले दोनों ने शादी की और युवक ने युवती की मांग में सिंदूर भी भरा। पुलिस ने बताया कि मृत युवक के हाथ में और जिस रस्सी से फांसी लगाई गई है उसमें भी सिंदूर लगा मिला। यह घटना सोनभद्र के कोन थान क्षेत्र में पड़ने वाले असनाबाध गांव की है। जानकारी के मुताबिक, दोनों के बीच काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। युवती के घरवालों को जब उसके प्रेम संबंध के बारे में पता चला तो उन्होंने आनन-फानन में उसकी कहीं और शादी तय कर दी। युवती का 13 जून को विवाह होने वाला था। मृतकों के घरवालों ने बताया कि दोनों एक-दूसरे से चोरी छिपे मिला करते थे। युवती ने घरवालों से अपनी शादी का विरोध भी किया, लेकिन घरवालों ने उसकी एक नहीं सुनी। इस बीच वह अपने प्रेमी से फोन पर बात करती रही। पुलिस ने बताया कि दोनों के बीच आखिरी बार फोन पर घटना वाले दिन यानि रविवार को तड़के 3:54 बजे के करीब बात हुई थी। बताते हैं कि रविवार तड़के दोनों ने फोन पर बात की और घर से कुछ दूरी पर स्थित एक बबूल के पेड़ के पास मिले, जहां फांसी लगाकर खुदकुशी करने से पहले विद्यासागर ने यशोदा के मांग में सिंदूर भी भरा। दोनों शवों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी में पोस्टमार्टम करवाया गया।

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दिल्ली। दिल्ली के वजीरपुर इलाके में 7 साल के एक बच्चे की नाले में लाश मिलने के बाद सनसनी फैल गई। बच्चा करीब 10 घंटे से लापता था, जिसकी परिजनों ने अशोक विहार थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस ने बताया कि शव पर चोट का कोई निशान नहीं मिला है और न ही किसी तरह के यौन शोषण के सबूत मिले हैं। बच्चे के परिजनों ने भी किसी से रंजिश की बात होने से इनकार किया है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मृतक बच्चे की पहचान सात साल के अंकुश के रूप में हुई है। अंकुश का परिवार वजीरपुर इलाके में अशोक विहार कॉलोनी के पास झुग्गी बस्ती में रहता है। परिजनों ने बताया कि दो दिन पहले ही शालीमार बाग स्थित एक सरकारी स्कूल में उन्होंने अंकुश का दाखिला करवाया था. परिवार में पति विनोद और पत्नी ऊषा व दो बेटे हैं, जिनमें अंकुश सबसे छोटा था।

 

पुलिस जांच कर रही है कि आखिर बच्चा घर से नाले तक कैसे गया। घर से नाले की दूरी 500 मीटर के करीब है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं कोई बहला-फुसलाकर तो बच्चे को नहीं ले गया था और गलत काम करने के बाद हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया हो। आस-पास के लोगों ने बताया कि नाले से कुछ ही दूरी पर असमाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। वहां पर शराब पीकर युवक सट्टा लगाने आते हैं। केशवपुरम थाना इलाके की पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है किसी ने बच्चे के चिल्लाने की आवाज़ तो नहीं सुनी थी। परिजनों ने बताया कि शनिवार की रात घर के पास ही एक शादी थी, जिसमें पूरा परिवार रात को खाना खाने गया हुआ था। दरअसल नाले से थोड़ी ही दूरी पर खाने-पीने की व्यवस्था थी। घरवाले खाना खा रहे थे, जबकि बच्चे पास में ही खेल रहे थे। लेकिन परिवार जब शादी समारोह में शामिल होकर घर लौटा तो बच्चा कहीं नहीं मिला। काफी खोजने के बाद भी जब बच्चा नहीं मिला तो परिवार अशोक विहार थाने पहुंचा और बच्चे की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई। परिजनों के साथ पुलिस वालों ने बच्ची की तलाश शुरू कर दी, लेकिन पूरे 10 घंटे बाद रविवार की सुबह जाकर बच्चे की लाश नाले में मिली। नाले के पास खेल रहे बच्चों को नाले में किसी का हाथ बाहर निकला हुआ दिखा और जब शव को बाहर निकाला गया तो उसकी पहचान अंकुश के रूप में हुई।

 

 

 

 

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